वित्त वर्ष 2025-26 के लिए HERC का सार्थक टैरिफ आर्डर: मांग पक्ष प्रबंधन और ऊर्जा संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता
बाबूशाही ब्यूरो
चंडीगढ़, 2 अप्रैल, 2025: उपभोक्ता राहत, ऊर्जा दक्षता और वित्तीय स्थिरता की दिशा में एक सार्थक पहल करते हुए, हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपना बहुप्रतीक्षित टैरिफ आर्डर जारी कर दिया है, जो 1 अप्रैल से लागू होगा। आयोग के अध्यक्ष श्री नन्द लाल शर्मा और सदस्य श्री मुकेश गर्ग के नेतृत्व में यह आर्डर पारित किया गया, जिसमें मांग पक्ष प्रबंधन (DSM), ऊर्जा संरक्षण, और उपभोक्ता-केंद्रित दृष्टिकोण को सर्वोपरि माना गया है।
इस आर्डर की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि घरेलू श्रेणी के ऐसे उपभोक्ताओं, जिनकी मासिक खपत 300 यूनिट तक और लोड 5 किलोवाट तक है, उनके लिए मासिक न्यूनतम शुल्क (MMC) को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है। अब इन उपभोक्ताओं को केवल अपनी वास्तविक खपत के अनुसार ही भुगतान करना होगा, जिससे उन्हें वित्तीय राहत भी मिलेगी और ऊर्जा की बचत को प्रोत्साहन मिलेगा। यह प्रावधान 15–20 पैसे प्रति यूनिट की मामूली दर वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करेगा तथा अनावश्यक खपत को रोकने में सहायक होगा।
टैरिफ आर्डर में कृषि उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की गई है। मीटर्ड कनेक्शन वाले कृषि उपभोक्ताओं के लिए MMC को ₹200 से घटाकर ₹180/₹144 प्रति BHP प्रति वर्ष किया गया है, जो लोड पर निर्भर करेगा। आयोग ने ₹4,520.24 करोड़ के प्रस्तावित राजस्व अंतर के अगेंस्ट केवल ₹3,262.38 करोड़ को स्वीकृत किया है, शेष अनुचित व्ययों को अस्वीकार कर दिया गया है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को लागत नियंत्रण और हानि में कमी लाने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
सतत कृषि को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से, आयोग ने एक नई टैरिफ श्रेणी निर्धारित की है, जिसमें मशरूम कंपोस्ट व स्पॉन उत्पादन, हाइड्रोपोनिक्स, एयरोपोनिक्स तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) द्वारा संचालित कोल्ड स्टोरेज इकाइयों को शामिल किया गया है। इस श्रेणी में 20 किलोवाट तक के लोड पर ₹4.75 प्रति यूनिट तथा उससे अधिक लोड पर ₹6.50 प्रति यूनिट की दर निर्धारित की गई है। आयोग ने वितरण हानि की अधिकतम सीमा 10% तय की है, और वितरण कंपनियों द्वारा प्रस्तुत अत्यधिक अनुमानों को खारिज कर दिया है। साथ ही, 6 माह के भीतर लागत-आधारित आपूर्ति अध्ययन (Cost of Supply Study) कराना अनिवार्य किया गया है। हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने हेतु, आयोग ने वितरण कंपनियों को पीएम सूर्य घर योजना को सरल बनाने, नेट मीटर की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 200 MWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) की स्थापना के निर्देश दिए हैं।
इस आर्डर में वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। वित्त वर्ष 2023-24 में व्यापारिक बकाया ₹2,877 करोड़ की वृद्धि के साथ ₹6,370 करोड़ तक पहुंच गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने बकाया वसूली और भंडारण प्रणाली के पुनर्गठन के निर्देश दिए हैं। हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (HVPNL) द्वारा ₹572.23 करोड़ की अनुपयोगी अधोसंरचना चिन्हित की गई है, जिसके लिए अधिक रणनीतिक और कुशल नियोजन की आवश्यकता बताई गई है। खराब मीटरिंग, ट्रांसफार्मर की क्षति, और लंबित कनेक्शन जैसी परिचालन संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने सभी शहरी फीडरों की AT&C हानियों को 20% से नीचे, और ग्रामीण फीडरों की हानियों को 40% से नीचे लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पहले क्रमशः 25% और 50% पर थे। उपभोक्ताओं के लिए सरल और पारदर्शी बिलिंग प्रणाली लागू करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु, आयोग ने हरियाणा पावर परचेज सेंटर (HPPC) के माध्यम से विद्युत खरीद की सघन निगरानी, तथा उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच (CGRF) और न्यायालय के आदेशों के समयबद्ध अनुपालन के लिए जन सुनवाई एवं लोक अदालतों के आयोजन के निर्देश दिए हैं।
यह टैरिफ आर्डर एक सार्थक और संतुलित सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करता है, बल्कि वित्तीय अनुशासन, संचालनात्मक दक्षता और हरित ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देता है। यह हरियाणा के विद्युत क्षेत्र में नियामकीय प्रशासन का एक नया मानक स्थापित करता है और राज्य की सस्ती, विश्वसनीय और टिकाऊ विद्युत आपूर्ति की प्रतिबद्धता को दोहराता है।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here →
Click to Follow हिन्दी बाबूशाही फेसबुक पेज →