पंचकूला में शिक्षा विभाग की अनदेखी से लुट रहे अभिभावक, निजी स्कूलों और बुक माफिया की मिलीभगत उजागर
रमेश गोयत
पंचकूला, 05 अप्रैल – पंचकूला में निजी स्कूलों की मनमानी और शिक्षा अधिकारियों की लापरवाही के चलते अभिभावकों पर किताबों और यूनिफॉर्म का भारी बोझ पड़ रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी उनकी शिकायतें सुनने को तैयार नहीं हैं और निजी स्कूल चुनिंदा बुकसेलरों के साथ मिलकर अभिभावकों को मजबूर कर रहे हैं कि वे किताबें और यूनिफॉर्म सिर्फ उन्हीं दुकानों से खरीदें।
अभिभावकों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से जिला शिक्षा अधिकारी के दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अधिकारी न तो उनसे मिलते हैं और न ही कोई ठोस जवाब देते हैं। एक अभिभावक ने कहा, "हमने जब पूछा कि किताबें तय दुकानों से क्यों खरीदनी पड़ रही हैं, तो शिक्षा अधिकारी ने साफ कह दिया – 'कौन कहां किताब बेच रहा है, ये मेरा काम नहीं। मंदिर में बिके या दुकान में, मेरा किताब बिकवाने का काम नही है।'"
मनमानी दाम, सीमित विकल्प, बढ़ता खर्च
अभिभावकों के मुताबिक किताबें खुले बाजार में उपलब्ध नहीं होतीं और स्कूलों द्वारा बताए गए दुकानों पर ही मिलती हैं, वो भी मनचाहे दामों पर। किताबों और यूनिफॉर्म का खर्च हजारों रुपये तक पहुंच रहा है। कई स्कूल यूनिफॉर्म, जूते और स्टेशनरी तक खास दुकानों से खरीदने का दबाव बना रहे हैं।
एक अभिभावक सुमन देवी ने बताया, "बच्चे की किताबें और यूनिफॉर्म मिलाकर 8,000 रुपये से ऊपर खर्च हो रहा है। हमारी पसंद की कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ी गई।"
पंचकूला स्कूल पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भारत भूषण बंसल ने कहा, "हर साल ये खेल दोहराया जाता है। हम मांग करते हैं कि स्कूल केवल एनसीईआरटी की किताबें लागू करें और अभिभावकों को किसी भी दुकान से खरीदारी की स्वतंत्रता दी जाए।"
अब मंदिर को बना दिया बुक शॉप: शिक्षा को व्यापार बना रहे हैं कुछ लोग
इस साल सबसे चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब पंचकूला सेक्टर-11 के एक मंदिर परिसर में ही बुक शॉप खोल दी गई। मंदिर के बाहर बड़े बैनर पर दुकान का नाम लिखा गया और स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को यहीं से किताबें खरीदने को कहा।
अभिभावक अजय कुमार ने बताया, “स्कूल ने कहा कि किताबें इसी दुकान से लेनी हैं। बाहर से खरीदने की बात की तो जवाब मिला कि बाहर ये किताबें नहीं मिलेंगी।”
यह मामला न सिर्फ शिक्षा को व्यापार में बदलने की ओर इशारा करता है, बल्कि धार्मिक स्थलों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी गंभीर सवाल उठाता है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है—या एक बार फिर अभिभावकों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा।
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अभिभावकों की शिकायतों के बाद जागा शिक्षा विभाग, बनाई निगरानी कमेटी
रमेश गोयत
पंचकूला, 05अप्रैल – निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। सेक्टर-7 स्थित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में डीईओ सतपाल कौशिक की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें पंचकूला जिले के निजी स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया।
डीईओ कौशिक ने बताया कि यह कमेटी पंचकूला, पिंजौर, बरवाला, रायपुररानी और मोरनी क्षेत्र के सभी निजी स्कूलों की फीस, किताबों, यूनिफॉर्म और दाखिले से जुड़ी प्रक्रियाओं पर निगरानी रखेगी। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियमावली के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह नियम रहेंगे अनिवार्य
कोई भी निजी स्कूल ट्यूशन फीस के अलावा डेवलपमेंट फीस, केपिटेशन फीस, मेडिकल, लैब या किसी अन्य प्रकार की अतिरिक्त फीस वसूल नहीं कर सकता।
फॉर्म-6 भरने से पहले कोई भी स्कूल फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकता।
सभी स्कूलों को अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर दाखिला प्रक्रिया, फीस संरचना, किताबें, यूनिफॉर्म आदि की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी।
पांच वर्षों से पहले यूनिफॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
किसी भी अभिभावक या छात्र को खास दुकानों से किताबें, यूनिफॉर्म, जूते-मोजे या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
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