हरियाणा भाजपा सरकार की नजर अब केवल और केवल लोगों की जेब पर : कुमारी सैलजा
कहा- पहले बढ़ाया टोल टैक्स, बिजली दरें और अब वसूला जाएगा गार्बेज क्लेक्शन चार्ज
बाबूशाही ब्यूरो
चंडीगढ़, 04 अप्रैल। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाने वाली जनता को कोई राहत प्रदान करने के बजाए हरियाणा सरकार लगातार लोगों की जेब काटने में लगी हुई है, सरकार की निगाह लोगों की समस्याओं से ज्यादा उसकी जेब पर लगी हुई है कि किस बहाने से पैैसा जनता की जेब से बाहर निकाला जाए। अब सरकार ने गार्बेज क्लेक्शन चार्ज (कचरा संग्रह शुल्क) वसूलने का फरमान जारी कर दिया है और इस बारे में प्रदेश की सभी नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों को पत्र लिखकर सचेत कर दिया गया है। झूठे वायदे करने वाली भाजपा की जुमलेबाज सरकारी को जनता कभी माफ नहीं करेगी।
मीडिया को जारी बयान में सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि डेढ़ साल पहले प्रदेश सरकार ने गार्बेज क्लेक्शन चार्ज बंद कर दिया था तब जनता को लगा कि उसे राहत प्रदान की गई है पर ऐसा चुनाव को ध्यान में रखकर ही किया होगा, काम होने के बाद फिर से भाजपा अपने तेवर दिखाने लगी है। अप्रैल माह नवरात्रा में सरकार जनता को कोई अच्छी खबर देने से तो रही पहले टोल टैक्स बढ़ाकर वाहन चालकों की कमर तोड़ डाली, इस प्राइवेट वाहनों ने किराया तक बढ़ा दिया है। इस सदमे से लोग बाहर निकले ही नहीं कि ऊपर से बिजली की दरों में वृद्धि कर जनता की कमर ही तोड़ डाली। बढ़ती महंगाई में एक एक पैसेे के लिए संघर्ष करने वाले परिवारों को अब गार्बेज क्लेक्शन चार्ज और देना पडेगा। शुल्क तो वहीं रखा है पहले उसे स्थगित कर दिया गया था और फिर से शुरू कर दिया है, यह शुल्क 60 रुपये से लेकर 60 हजार रुपये तक रखा गया है। मकान के क्षेत्रफल के आधार पर शुल्क रखा गया है व्यवसायिक प्रतिष्ठान और उद्योगों के लिए अलग से दरें रखी गई है, धार्मिक स्थल, धर्मशाला, खेल क्लब को इस शुल्क से दूर रखा गया है।
सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 से इस शुल्क की वसूली करेगी और यह शुल्क प्रोपर्टी टैक्स के साथ जुड़कर आएगा। रिहायशी मकानों पर सरकार की ओर से 60 रुपये से 1200 रुपये वार्षिक शुल्क रखा गया है। शैक्षणिक संस्थाओं पर 12 हजार से 24 हजार रुपये वार्षिक जबकि सरकारी कार्यालय और संस्थाओं पर 1800 रुपये वार्षिक शुल्क रखा गया है। दुकानों और अस्पतालों से क्षेत्रफल के अनुसार 300 रुपये से 60 हजार रुपये तक वार्षिक शुल्क रखा गया है। कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था पहले से ही लचर है। जिन शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने में अरबों रुपये खर्च किए गए थे वहां आज भी नरक जैसे हालात है, शहरों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं बावजूद इसके शुल्क लगाना इस सरकार का तानाशाही रवैया कहा जा सकता है। सरकार को महंगाई की मार झेल रही जनता को राहत प्रदान के लिए इस फैसले को वापस लेना चाहिए। पहले सफाई व्यवस्था सुधारनी चाहिए और जनता के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
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