हरियाणा में रजिस्ट्री के नाम पर रिश्वत का खेल,
तहसीलों में “सुपारी डॉक्युमेंट राइटर” सक्रिय!
अधिकतर रजिस्ट्री इन्हीं के माध्यम से विजिलेंस जांच का विषय
तहसीलदार, सेवादार और डॉक्युमेंट राइटर की सांठगांठ उजागर
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 5 अप्रैल:
हरियाणा की तहसीलों में रजिस्ट्री कार्य के नाम पर रिश्वतखोरी का एक बड़ा और सुनियोजित खेल वर्षों से जारी है, जिसमें तहसीलदारों, डॉक्युमेंट राइटरों और सेवादारों की आपसी सांठगांठ सामने आ रही है। जिले की तहसीलों में “सुपारी डॉक्युमेंट राइटर” सक्रिय हैं। इन्हीं सुपरहिट डॉक्यूयुमेंट राइटर के मार्फत सबसे ज्यादा रजिस्ट्रियां होती है। यह डॉक्यूयुमेंट राइटर ना होने वाली रजिस्ट्री का भी मोटा ठेका लेकर रजिस्ट्री करवाने की जिम्मेदारी लेते हैं।
हाल ही में तहसील गोहाना में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की कार्रवाई में एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार हुए अर्जी नवीस राजीव कुमार मल्होत्रा उर्फ यशपाल मल्होत्रा ने इस नेटवर्क की परतें खोल दी हैं।
डॉक्युमेंट राइटर बने रिश्वत वसूली के माध्यम
जांच में सामने आया है कि अधिकांश तहसीलों में कार्यरत तहसीलदारों ने कुछ "विश्वसनीय" डॉक्युमेंट राइटर को ही रजिस्ट्री लिखने का विशेषाधिकार दे रखा है। आम आदमी को परोक्ष रूप से उन्हीं डॉक्युमेंट राइटरों के पास भेजा जाता है, जिनके जरिए रिश्वत वसूली होती है। सूत्रों के अनुसार, तहसीलदार स्वयं इन नामचीन राइटरों का नाम लेकर रजिस्ट्री लिखवाने के निर्देश देते हैं। यह सिलसिला इतना व्यवस्थित है कि अधिकतर रजिस्ट्री इन्हीं के माध्यम से होती हैं, जो अब विजिलेंस जांच का विषय बन चुकी है।
सेवादार निभाते हैं “सूचना एजेंट” की भूमिका
तहसील कार्यालयों में तैनात सेवादार भी इस अवैध प्रणाली का एक अहम हिस्सा बने हुए हैं। इनका मुख्य कार्य यह देखना होता है कि कौन आया, किस डॉक्युमेंट राइटर के पास गया, और किससे कितनी राशि ली गई। यह सारी जानकारी शाम को तहसीलदार को “रिपोर्ट” के रूप में दी जाती है। बदले में तहसीलदार उन्हें वसूली गई रिश्वत की एवरेज राशि में से कमीशन देते हैं।
गोहाना कांड से खुला रिश्वत नेटवर्क का राज
गोहाना तहसील में हाल ही में हुए भंडाफोड़ में आरोपी डॉक्युमेंट राइटर राजीव कुमार मल्होत्रा ने एसीबी को दिए बयान में स्पष्ट किया कि वह तहसीलदार अभिमन्यु और सेवादार आशीष के साथ मिलकर प्रति गज 150-250 रुपये की दर से रजिस्ट्री के एवज में रिश्वत वसूलते थे। इसमें से 20 रुपये प्रति गज वह व आशीष आपस में बांटते थे, जबकि बाकी रकम तहसीलदार को पहुंचाई जाती थी।
प्रदेशव्यापी जांच की जरूरत
इस पूरे मॉडल से यह स्पष्ट है कि यह कोई एक तहसील या अधिकारी की करतूत नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा में फैला हुआ एक नेटवर्क है। लगभग हर जिले की तहसीलों में इसी तरह के “सुपारी डॉक्युमेंट राइटर” सक्रिय हैं। अब जरूरत है कि विजिलेंस ब्यूरो और राज्य सरकार पूरे प्रदेश की तहसीलों की सघन जांच करवाए और इस संगठित रिश्वत तंत्र पर निर्णायक प्रहार किया जाए।
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