कॉपी-किताबों के नाम पर अभिभावकों से लूट, शिक्षा विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में
कॉपी पर मुनाफा, पन्नों में धोखा! किताबों की दुकानों पर खुलेआम लूट, शिक्षा विभाग बेखबर
रमेश गोयत
चंडीगढ़,05 अप्रैल। शहर के स्कूलों में नया सत्र शुरू होते ही किताब-कॉपी के नाम पर लूट का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। सेक्टर-22 और 19 की किताबों की दुकानों पर अभिभावकों से जबरन महंगे दाम वसूले जा रहे हैं। दुकानदार जहां स्टेशनरी पर मनमाना मुनाफा कमा रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। "128 पन्नों की कॉपी", कीमत 45 रुपये—पर जब स्टिकर हटाया तो निकली 20 रुपये की कॉपी और वो भी सिर्फ 64 पेज की। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही चंडीगढ़ के बुक स्टोर्स पर अभिभावकों की जेबें हल्की करने का सिलसिला तेज हो गया है। सेक्टर-22 और 19 की दुकानों पर किताबों और स्टेशनरी के नाम पर खुली लूट मची है, लेकिन शिक्षा विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
नियमों को ठेंगा, निजी प्रकाशकों की किताबें थोपे जा रहे
सीबीएसई की सख्त गाइडलाइंस के बावजूद स्कूल न केवल एनसीईआरटी की जगह निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें बेचवा रहे हैं, बल्कि अभिभावकों को सिर्फ एक खास दुकान से खरीदने को मजबूर किया जा रहा है। पहली से आठवीं तक के छात्रों की किताबों का खर्च 3 हजार से 9 हजार रुपये तक पहुंच रहा है।
ड्यूल प्राइजिंग और नकली पन्ने: लूट की दोहरी मार
एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह सिलसिला मार्च से चल रहा है। शिकायतों के बावजूद शिक्षा विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। स्कूलों द्वारा केवल एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने के नियम के बावजूद निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बेची जा रही हैं। पहली से आठवीं तक की किताबों का खर्च 3 से 9 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
स्कूल पुरानी किताबों पर अड़े, नई एनसीईआरटी किताबें नकार दीं
सेक्टर-44 स्थित एक निजी स्कूल ने एनसीईआरटी की नई गणित पुस्तक को अस्वीकार कर दो साल पुरानी किताब मंगवाने के निर्देश दिए हैं। जब अभिभावकों ने सवाल उठाया तो स्कूल ने मैसेज भेजकर कहा कि बच्चों को पुरानी किताब के चैप्टर की पीडीएफ दे दी जाएगी। इस पर अभिभावकों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
क्या बोले अधिकारी?
"हमें इस तरह की शिकायतों की जानकारी नहीं थी। अगर कोई वीडियो या मैसेज भेजेगा तो हम जांच कर कार्रवाई करेंगे।"
- हरसुहिंदरपाल सिंह बराड़, निदेशक, स्कूल शिक्षा विभाग
"ड्यूल प्राइजिंग गंभीर मामला है। स्कूलों को एक बुक स्टोर से किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य हैं।"
- शिप्रा बंसल, चेयरपर्सन, चंडीगढ़ चाइल्ड प्रोटेक्शन कमीशन
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