सरकार ने पीपीएफ खातों में नामांकन अपडेट करने पर शुल्क हटाया
बाबूशाही ब्यूरो
नई दिल्ली, 04 अप्रेल। केंद्र सरकार ने गुरुवार को घोषणा की कि वित्तीय या बैंकिंग संस्थान अब सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF) खातों के नामांकित व्यक्तियों को अपडेट करने के लिए कोई शुल्क नहीं लेंगे। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि सरकारी बचत संवर्धन सामान्य नियम, 2018 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं, जिससे बैंकिंग संस्थान अब बिना किसी शुल्क के यह बदलाव करने के लिए बाध्य होंगे।
सरकार की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब हाल ही में बैंकिंग संशोधन विधेयक 2025 पारित किया गया है। इस विधेयक के तहत जमाकर्ताओं के धन, सुरक्षित अभिरक्षा में रखे गए सामान और सुरक्षा लॉकरों के भुगतान के लिए अधिकतम चार व्यक्तियों को नामित करने की अनुमति दी गई है।
नामांकन शुल्क हटाने का निर्णय
अधिसूचना के अनुसार, यह आदेश 2 अप्रैल 2025 से प्रभावी होगा। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि सरकारी बचत संवर्धन सामान्य नियम, 2018 के अनुसूची II में सेवाओं के लिए ली जाने वाली फीस के अंतर्गत "नामांकन का रद्दीकरण या प्रभार - 50 रुपये" को हटा दिया गया है।
वित्त मंत्री ने दी जानकारी
माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, "हाल ही में मुझे सूचित किया गया था कि पीपीएफ खातों में नामांकित व्यक्ति के विवरण को अपडेट या संशोधित करने के लिए वित्तीय संस्थानों द्वारा शुल्क लिया जा रहा था। इसे समाप्त करने के लिए हमने सरकारी बचत संवर्धन सामान्य नियम, 2018 में आवश्यक बदलाव किए हैं।"
पीपीएफ योजना का महत्व
पीपीएफ भारत में एक दीर्घकालिक निवेश योजना है, जो कर लाभ और गारंटीड रिटर्न प्रदान करती है। इसमें न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष का निवेश किया जा सकता है।
सरकारी बचत योजनाओं में सुधार
इसके अलावा, सरकार ने सरकारी बचत प्रमाणपत्र अधिनियम, 1959 और सार्वजनिक भविष्य निधि अधिनियम, 1968 को सरकारी बचत बैंक अधिनियम, 1873 के साथ विलय करने का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न लघु बचत योजनाओं के प्रावधानों में एकरूपता लाना है।
यह निर्णय देशभर के निवेशकों के लिए राहत भरा साबित होगा, क्योंकि अब वे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के अपने पीपीएफ खातों के नामांकित व्यक्तियों को अपडेट कर सकेंगे।
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