हरिपुर में माता सुकराला देवी मंदिर बना श्रद्धा का केंद्र, नवरात्रों में उमड़ती है आस्था की भीड़
बाबूशाही ब्यूरो
हरिपुर (जिला कांगड़ा), हिमाचल प्रदेश — ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से समृद्ध हरिपुर तहसील, जहां राजा हरिश्चंद्र के नाम पर इस स्थान का नाम पड़ा, आज भी अपने गौरवशाली इतिहास और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। ज्वाला जी माता मंदिर से मात्र 25 किलोमीटर, बगलामुखी मंदिर से 8 किलोमीटर और प्रसिद्ध मसरूर मंदिर से 15 किलोमीटर दूर स्थित यह क्षेत्र अब एक और धार्मिक स्थल के लिए श्रद्धालुओं का केंद्र बनता जा रहा है — माता सुकराला देवी मंदिर, हरिपुर।
यह मंदिर वर्ष 2008 में जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के बिलावर व बसौली क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध सुकराला माता मंदिर से लाई गई पवित्र जोत से स्थापित हुआ। तब से लेकर आज तक हर वर्ष नवरात्रों के दौरान यहां भव्य हवन, पूजा-अर्चना, और विशाल लंगर भंडारा आयोजित होता है। हजारों श्रद्धालु दूर-दूर से यहां माता के दर्शन और प्रसाद ग्रहण करने पहुंचते हैं, विशेष रूप से वे लोग जो किसी कारणवश जम्मू-कश्मीर नहीं जा सकते।
मंदिर की स्थापना सुरेश कुमारी महाजन ने की थी, जो एक सेवानिवृत्त अध्यापिका, सामाजिक कार्यकर्ता और महिला मंडल की सक्रिय प्रधान भी हैं। उनकी अगुवाई में इस मंदिर ने न सिर्फ धार्मिक बल्कि सामाजिक गतिविधियों का भी केंद्र बनकर क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि माता सुकराला देवी यहां साक्षात विराजमान हैं और सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी करती हैं। गूगल पर भी यदि सुकराला माता मंदिर सर्च किया जाए तो इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता स्पष्ट दिखाई देती है।
हरिपुर का यह धार्मिक स्थल अब स्थानीयों के साथ-साथ हिमाचल के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था और विश्वास का नया केंद्र बन चुका है।
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