हरियाणा विधानसभा के स्पीकरों का सफर: शन्नो देवी से लेकर हरविंदर कल्याण तक
रमेश गोयत
चंडीगढ़, 04 अप्रैल। हरियाणा राज्य की स्थापना 1 नवंबर 1966 को हुई और उसी के साथ प्रदेश की विधानसभा की नींव रखी गई। विधानसभा के अध्यक्ष यानी स्पीकर का पद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। स्पीकर न केवल सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं, बल्कि वे राजनीति से ऊपर उठकर निष्पक्षता और गरिमा का प्रतीक बनते हैं। पिछले छह दशकों में हरियाणा ने ऐसे कई नेताओं को इस पद पर देखा, जिन्होंने अपने-अपने कार्यकाल में संसदीय परंपराओं और मर्यादाओं को सशक्त बनाया।
शुरुआत एक महिला नेतृत्व से: शन्नो देवी (1966-67)
हरियाणा विधानसभा की पहली स्पीकर बनीं शन्नो देवी, जो न केवल राज्य की पहली महिला स्पीकर थीं बल्कि पूरे भारत की किसी भी विधानसभा की पहली महिला स्पीकर भी रहीं। उन्होंने 6 दिसंबर 1966 से 17 मार्च 1967 तक यह पद संभाला। उनका कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन ऐतिहासिक महत्व का था और उन्होंने महिलाओं के लिए राजनीति में नेतृत्व की मिसाल कायम की।
राजनीतिक अस्थिरता और नेतृत्व परिवर्तन (1967–1968)
1967 का साल हरियाणा की राजनीति में अस्थिरता का दौर था। इस समय राव बीरेन्द्र सिंह (17 मार्च से 23 मार्च 1967) और चौधरी शिरी चंद (30 मार्च से 19 जुलाई 1967) जैसे नेताओं ने संक्षिप्त समय के लिए स्पीकर का कार्यभार संभाला।
स्थिरता की ओर: ब्रिगेडियर रण सिंह और बी. डी. गुप्ता का काल
1968 में ब्रिगेडियर रण सिंह को स्पीकर नियुक्त किया गया, जिन्होंने 1972 तक इस पद को सुशोभित किया। सैन्य अनुशासन और नेतृत्व कौशल से युक्त रण सिंह ने विधानसभा की कार्यवाही में अनुशासन और मर्यादा का संचार किया। बाद में 1977 में उन्हें दोबारा यह जिम्मेदारी दी गई।
1972 में बी. डी. गुप्ता ने स्पीकर का पद संभाला और उन्होंने 15 नवंबर 1973 तक इस भूमिका को निभाया।
चौधरी सरूप सिंह से लेकर 1980 के दशक तक
1973 से 1977 तक चौधरी सरूप सिंह विधानसभा के स्पीकर रहे। इसके बाद दोबारा ब्रिगेडियर रण सिंह और फिर कर्नल राम सिंह (1978–1982) इस पद पर काबिज हुए। सेना से राजनीति में आए इन नेताओं ने सदन की गरिमा को नई ऊँचाई दी।
1982 से 1987 तक एस. तारा सिंह और फिर 1987 से 1991 तक हरबीर सिंह चाठा ने सदन का संचालन किया।
1990 के दशक में लोकतांत्रिक अनुभव का विस्तार
1991 में चौधरी ईश्वर सिंह स्पीकर बने और 1996 तक इस भूमिका में रहे। इसके बाद चौधरी चत्तर सिंह चौहान (1996–1999) और अशोक कुमार अरोड़ा (1999–2000) ने यह पद संभाला।
सुधार और नए युग की शुरुआत
2000 में चौधरी सतबीर सिंह कादियान को स्पीकर चुना गया। उनके कार्यकाल (2000–2005) को विधान सुधार और मर्यादा की दृष्टि से सकारात्मक माना गया।
इसके बाद हरबीर सिंह चाठा दोबारा 2005 में स्पीकर बने, और फिर 2009 में तीसरी बार इस पद पर लौटे। तीन बार स्पीकर बनने वाले वे हरियाणा के पहले नेता बने।
नवाचार और अनुभव के साथ नेतृत्व
2006 से 2009 तक डॉ. रघुबीर कादियान स्पीकर रहे। उनका कार्यकाल शांत और संयमित रहा। 2011 से 2014 तक पं. कुलदीप शर्मा ने सदन का संचालन किया।
2014 में चौधरी कंवर पाल गुर्जर को यह जिम्मेदारी सौंपी गई, जिन्होंने 2019 तक अपने अनुभव और कुशल संचालन से स्पीकर पद को सम्मानित किया।
हालिया दौर: ज्ञान चंद गुप्ता से हरविंदर कल्याण तक
2019 में वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान चंद गुप्ता ने हरियाणा विधानसभा के 20वें स्पीकर के रूप में पदभार संभाला। उन्होंने संसदीय परंपराओं को सुदृढ़ किया और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा दिया।
वर्तमान में, 24 अक्टूबर 2024 से हरविंदर कल्याण हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हैं। वे अनुभवी राजनेता हैं और निष्पक्षता तथा तेज निर्णय क्षमता के लिए जाने जाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि उनके कार्यकाल में विधानसभा और अधिक पारदर्शी और अनुशासित बनेगी।
लोकतंत्र की परंपराओं को बनाए रखने वाले प्रहरी
हरियाणा विधानसभा के स्पीकरों की यह यात्रा केवल नामों की सूची नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूत नींव की कहानी है। हर एक स्पीकर ने अपने-अपने कालखंड में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की और विधानसभा को जनहित की नीति-निर्माण संस्था बनाए रखने में योगदान दिया।
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