चंडीगढ़ में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल,
ठेकेदारों ने की स्वतंत्र अधिकारियों की नियुक्ति की मांग
*पहले जिला उपायुक्त के पास थी आबकारी विभाग की जिम्मेदारी
रमेश गोयत
चडीगढ़, 27 मार्च। चंडीगढ़ के गठन के बाद से ही आबकारी एवं कराधान विभाग (Excise & Taxation Department) की पूरी जिम्मेदारी चंडीगढ़ के जिला उपायुक्त (DC) के पास होती थी। उपायुक्त न केवल शराब नीति की निगरानी करते थे, बल्कि आबकारी विभाग के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों को भी संभालते थे। इससे विभाग में एक सुव्यवस्थित कार्यशैली बनी हुई थी, और शराब ठेकों के आवंटन एवं राजस्व वसूली में पारदर्शिता बनी रहती थी।
2024 लोकसभा चुनाव में शराब तस्करी के बाद बदला गया चार्ज
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान शराब की भारी मात्रा में तस्करी (Liquor Smuggling) की शिकायतें मिली थीं। इसके बाद प्रशासक ने आबकारी विभाग का चार्ज उपायुक्त से हटाकर यूटी कैडर के आईएएस अधिकारी रूपेश कुमार को सौंप दिया था।
रूपेश कुमार पहले एक्साइज कलेक्टर के तौर पर काम कर चुके थे, इसलिए उन्हें विभाग की गहरी समझ थी। जब उन्हें आबकारी आयुक्त (Excise Commissioner) का चार्ज दिया गया, तो उन्होंने शराब तस्करी पर पूरी तरह लगाम कस दी थी। उनके कार्यकाल में विभाग में कई सुधार किए गए, जिससे सरकारी राजस्व में वृद्धि हुई और तस्करी के मामलों में कमी आई।
रूपेश कुमार के हटते ही फिर बढ़ने लगीं खामियां
रूपेश कुमार के ट्रांसफर के बाद, आबकारी विभाग में लगातार अनियमितताएं बढ़ने लगीं। ठेकेदारों का आरोप है कि अब विभाग में कोई ठोस प्रशासनिक नियंत्रण नहीं है और अधिकारी अपने मनमाने तरीके से कार्य कर रहे हैं।
पहले आबकारी विभाग का चार्ज उपायुक्त (DC) के पास था, लेकिन अब यह जूनियर अधिकारियों के पास चला गया है।
पिछले दो वर्षों में कई कलेक्टर और एईटीसी (AETC - Assistant Excise & Taxation Commissioner) बदले जा चुके हैं।
वर्तमान में AETC का चार्ज UT कैडर के एक अधिकारी के पास है, जबकि कलेक्टर का चार्ज शिक्षा विभाग के एक PCS अधिकारी के पास है।
"शिक्षा अधिकारी अब शराब के ठेके बेचने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं"
शराब ठेकेदारों ने सवाल उठाया है कि आबकारी विभाग का चार्ज ऐसे अधिकारी को क्यों दिया गया है, जिसकी प्राथमिक जिम्मेदारी शिक्षा विभाग चलाना है।
"जिस अधिकारी को शिक्षा का पाठ पढ़ाना चाहिए, उसे अब शराब के ठेके बेचने की जिम्मेदारी दी गई है। यह प्रशासनिक निर्णय बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।"
स्वतंत्र अधिकारियों की मांग
चंडीगढ़ के शराब ठेकेदारों ने इस स्थिति पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि –
AETC और कलेक्टर की जिम्मेदारी एक स्वतंत्र अधिकारी को सौंपी जाए, जो पूर्ण रूप से आबकारी विभाग के कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
आबकारी कराधान आयुक्त (Excise & Taxation Commissioner) का चार्ज फिर से चंडीगढ़ के उपायुक्त (DC) को सौंपा जाए, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली में स्थिरता और पारदर्शिता बनी रहे।
आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में अनुभवी और ईमानदार अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
यूटी कैडर के अधिकारी कर रहे हैं गुमराह, करोड़ों के राजस्व का नुकसान
आबकारी विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में यूटी कैडर के अधिकारी जूनियर अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं और गलत फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
इसके कारण चंडीगढ़ प्रशासन को हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
ऑडिट रिपोर्ट में भी इस राजस्व हानि का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।
प्रशासन से जांच और सुधार की मांग
ठेकेदारों और व्यापारियों ने चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से इस मामले में हस्तक्षेप करने और आबकारी विभाग में सुधार की मांग की है।
आबकारी विभाग में यूटी कैडर के अधिकारियों के हस्तक्षेप को रोका जाए।
विभाग को फिर से स्वतंत्र और अनुभवी अधिकारियों के हाथों में सौंपा जाए।
आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में संबंधित विशेषज्ञों और व्यापारियों से सलाह ली जाए। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण आज ठेकेदारो ने इस गड़बड़ी को रोकने के लिए हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा है।
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